बारूद के ढेर पर आश्रित 2500 परिवार: पैसों के लालच में ग्रामीण जिंदा बम तक उठा लाते हैं,500 लोग हाथ-पैर खो चुके

बीकानेर के पास स्थित महाजन फायरिंग रेंज के आसपास 34 गांव लगे हुए हैं। इनमें करीब 2500 परिवार रहते हैं। इनमें से ज्यादातर अपना जीवन चलाने के लिए रेंज से स्क्रैप लाकर बेचने का काम करते हैं।

पैसों के लालच में कई बार ग्रामीण फायरिंग रेज से जिंदा बम तक उठा लाते हैं। इन्हें खोलने की कोशिश करते समय कई बार ये बम फट जाते हैं। अब तक करीब 500 लोग इन हादसों में अपने हाथ-पैर खो चुके हैं।

ग्रामीण तोप से निकले हुए गोले, मिसाइल, लैंडमाइन, बुलेट्स और बमों का स्क्रैप बीनने का काम करते हैं। हालत यह है कि अब कई परिवारों का खर्चा बच्चे उठा रहे हैं या पशु चराकर गुजारा चल रहा है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है। फूलेजी गांव का पेमाराम अपने साथियों के साथ रात को चोरी छिपे महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में स्क्रैप बीनने गया। इस दौरान बम का एक टुकड़ा लगने से वह जख्मी हो गया। उसके सिर में गंभीर चोट आई, गनीमत रही कि जान बच गई।

पुलिस रिकाॅर्ड में दर्ज ही नहीं है कई ग्रामीणाें की माैत

ग्रामीणों का कहना है कि रेंज के आस-पास हुए हादसों में दम तोड़ चुके काफी लोगों के नाम पुलिस रिकाॅर्ड में दर्ज ही नहीं हो सके। परिजनों को या तो उनकी लाशें नहीं मिलीं या कइयों ने पुलिस को बताए बिना अंतिम संस्कार करवा दिया। ऐसे हादसों में 35 सैनिकों की भी जान जा चुकी है।

कोई गैस कटर से बम काट रहा था, तो कोई लैंडमाइन फटने का शिकार हुआ

केस 1. गोपालसर का उदाराम (55) ठेकेदार के बाड़े में गैस कटर से बम काट रहा था। उसी दौरान वह फट गया। इस हादसे में उसका एक पैर चला गया। विकलांग पेंशन आती है। बच्चे पशु चराने जाते हैं। उसी से गुजारा चलता है।

केस 2. गोपालसर का सागरमल सोनी 41 साल का है। 12-13 साल की उम्र में वाे फायरिंग रेंज में स्क्रैप बीनने गया था। छोटी लैंडमाइन फटने से एक हाथ का पंजा उड़ गया और दूसरे हाथ की अंगुलियां गंवानी पड़ीं। पशुओं को चराकर परिवार को पाल रहा है।

केस 3. मोहनलाल मेघवाल (42) ठेकेदार के बाड़े में पंखा चलाकर स्क्रैप से धूल उड़ा रहा था। इसी दौरान बम फट गया। उसके शरीर का एक तरफ का हिस्सा बेकार हो गया।

1984 में बनी थी महाजन रेंज, विदेशी सेनाएं भी यहां करती हैं अभ्यास

1984 में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100-200 किमी दूर सेना के अभ्यास के लिए महाजन फील्ड फायरिंग रेंज बनाई गई। लूणकरणसर तहसील के 34 गांव खाली कराए गए थे। इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को दूसरी जगह जमीन दी गई। 1987 से रेंज में ताेपाें का अभ्यास शुरू हो गया, जिसे बाद में युद्धाभ्यास नाम दिया गया।

विदेशी सेनाओं के साथ युद्धाभ्यास होने के कारण रेंज का अंतरराष्ट्रीय महत्व हो गया है। अभी अमेरिका और भारत की सेनाएं युद्धाभ्यास कर रही हैं। इससे पहले भी अमेरिकी सेना यहां आ चुकी हैं। रूस, फ्रांस सहित कई देशों की सेनाएं यहां अभ्यास कर चुकी हैं। इसके अलावा भारतीय सेना का अभ्यास चलता रहता है।

स्क्रैप का ठेका देती है सेना, फिर भी होती हैं चोरी की घटनाएं

महाजन रेंज में 1992 से स्क्रैप के ठेके होने लगे। इस अवधि में गांवों के लोग झुंड में जाते थे और बमों के खोल उठा ले आते। उन्हें कबाड़ियों को बेच देते। स्क्रैप की चोरी आज भी हो रही है। रेंज के चाराें ओर फेंसिंग नहीं होने के कारण स्क्रैप की चोरी भी होती है। इन गरीबाें को दो वक्त की रोटी अब विकलांग पेंशन और पशु चराने से मिल रही है।

फूलेजी के सरपंच राजाराम कहते हैं कि महाजन फायरिंग रेंज में कई साल से हादसों में कमी आई है। वही लोग रेंज में जाते हैं, जिन्होंने स्क्रैप के ठेके ले रखे हैं। लेकिन चोरियां आज भी हो रही हैं। रात के अंधेरे में लोग बमों के खोल उठा लाते हैं और कबाड़ियों को बेच देते हैं। ऐसा करके वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

साहबराम को स्क्रैप चुराते समय गोली लगी तो पैर गंवाना पड़ा। बड़े भाई का एक फेफड़ा खराब हो चुका है।

जसवंतसर का साहबराम (55) और बड़ा भाई बृजलाल (60) गांव वालों के साथ पहली बार ही स्क्रैप चुराने गए थे। दूर कहीं फायरिंग हो रही थी। वे एक जगह बैठकर फायरिंग रुकने का इंतजार करने लगे कि एक गोली साहबराम के पैर पर और दूसरी बड़े भाई की गर्दन के पास लगी।

साहबराम को पैर गंवाना पड़ा। बृजलाल का तीन साल तक जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज चला। गोली फेफड़े में जाकर फंस गई थी। ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने उसकी जान तो बचा ली, लेकिन अब एक फेफड़े से ही काम चलना पड़ रहा है।

लैंडमाइन फटने से इमीचंद गोदारा का पंजा उड़ गया।

ऐसे रुक सकते हैं हादसे

महाजन फायरिंग रेंज तीन लाख 37 हजार एकड़ में फैली हुई है। इसके बीच से स्टेट हाइवे निकल रहे हैं। नियमानुसार इसकी चार दीवारी होनी चाहिए।

लोगों के प्रवेश को कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाए।

ठेकेदार ब्लाइंड बमाें की सूचना तत्काल सेना को दे, ताकि उन्हें नष्ट कर किया जा सके।

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