15 साल जेल की सज़ा काटकर घर आये, जेल में कमाए पैसों से बेटी को दिया स्मार्टफोन ताकि वो पढ़ पाए

आनंद नगेशिया ने 15 साल जेल में सजा काटने के बाद अपने घर में वापस कदम रखा. जब उन्हें सजा हुई थी तब उनकी बेटी यामिनी की उम्र महज़ 1 साल थी. अपनी बेटी का बचपन उन्होंने नहीं देखा है. 40 साल के आनंद को अपने चाचा की हत्या के लिए उम्रकैद जेल की सज़ा हुई थी.

मीडिया के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अपने गांव में वापस पहुंचकर अपने परिवार और बेटी से मिलना आनंद के लिए उत्साहित करने वाला मौका था. मगर जल्द ही उन्होंने आभास किया कि उनकी बेटी को ऑनलाइन क्लासेज लेने में परेशानी हो रही थी क्योंकि उसके पास स्मार्टफ़ोन नहीं था.

इसे देखकर उन्होंने अपने जेल में कमाए हुए पैसों से एक स्मार्टफ़ोन खरीदा. 12वीं में पढ़ने वाली यामिनी के समस्या उसके पिता ने सॉल्व कर दी.

नगेशिया ने कहा, “मेरी बेटी के पास क्लास लेने के लिए फ़ोन नहीं था. वो बड़ी होकर एक डॉक्टर बनना चाहती है. मैंने जेल में रहने के दौरान शिक्षा का महत्व समझा. मैं अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं चाहता और उसे किसी रुकावट के सामना नहीं करने देना चाहता.”

अंबिकापुर जेल के SP Rajendra Gaikwad ने कहा, आनंद के अच्छे बर्ताव के चलते उन्हें जल्दी रिलीज़ कर दिया गया. उन्हें 15 साल 5 महीने की सजा के बाद रिहा कर दिया गया. आनंद ने समाज के लिए एक उदाहरण पेश किया है कि लोग लड़कियों को शिक्षित करें.

बताते चलें, नगेशिया ने जेल में गार्डनिंग और कारपेंटरी सीखी है. वो अब अपनी पैतृक ज़मीन पर खेती करके अपना जीवन जीना चाहते हैं.

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