करनाल में फर्जी टीबी मरीज दिखा कर दिया 14 लाख का फर्जीवाड़ा, जानिए पूरा मामला

करनाल। करनाल में फर्जी टीबी मरीजों की आड़ में 14 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा कर दिए जाने का मामला सामने आया है। सीएमओ ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दी है, जिसके आधार पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी शिकायत अनुसार

सीएमओ योगेश शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों को छह माह के लिए प्रति माह 500 रुपये का लाभ दिया जाता है, लेकिन जिला क्षय रोग अधिकारी डा सिम्मी कपूर ने उन्हें शिकायत देकर बताया था कि संबंधित पोर्टल पर फर्जी आइडी बना ली गई और बड़ी संख्या में फर्जी मरीज दर्शा दिए गए। करीब 14 लाख रुपये का सरकार की उक्त योजना के तहत लाभ भी जारी करवा लिया गया। जब रिकार्ड में यह मिलान किया गया तो पता चला कि फर्जी मरीज दिखाए गए हैं। शिकायत मिलने पर उन्होंने जांच के लिए एक कमेटी का भी गठन किया, जिसने 34 पन्नों की फर्जी मरीजों की सूची संबंधित आइडी से प्राप्त की।

किया पोर्टल के पासवर्ड का दुरूपयोग

जांच कमेटी द्वारा इस सूची का अवलोकन करने के पश्चात तीन स्वास्थ्य केन्द्रों की सूची में से मरीजों के नाम सम्बंधित कर्मचारियों को देकर उनके टीबी रिकार्ड की जांच की गई । इन संस्थानों पर इन मरीजों का कोई रिकार्ड प्राप्त नही हुआ । डा. सिम्मी कपूर ने बताया कि जहां सरकार की ओर से योजना के तहत उक्त लाभ मरीजों को दिया जाता है वहीं इसमें सर्वप्रथम चिकित्सक द्वारा मरीज की जांच की जाती है तथा यदि उसे टीबी से ग्रसित पाया जाता है तो उस का नाम पोर्टल पर रजिस्ट्रड आइडी से दर्ज कर लिया जाता है।

उन्होंने बताया कि संबंधित पोर्टल के पासवर्ड का दुरूपयोग करते हुए इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि सर्वेक्षण के लिए जो कर्मी जाता था, उसे भी एक हजार रुपये प्रति मरीज दिया जाता था। हालांकि समिति ने संबंधित योजना से जुड़े विभाग के पांच लोगों के बयान लिए है, जिन्होंने आइडी व पासवर्ड किसी को देने से इंकार किया है, लेकिन यह भी आशंका है कि किसी न किसी की मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। ऐसे में मामले की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कमेटी की जांच में भी फर्जीवाड़ा होने की शकां : सीएमओ

सीएमओ योगेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने आशंका होते ही एक कमेटी से जांच कराई, जिसने भी अपनी जांच में फर्जीवाड़ा बताया है। अब इस मामले की जांच पुलिस द्वारा की जानी है। इस संबंध में शिकायत दे दी गई है।