इस कॉलेज के 13 विद्यार्थी हुए देश के लिए बलिदान ! इस कॉलेज को कहते है वीरों का कॉलेज

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चंडीगढ़ । सिटी ब्‍यूटीफुल में है वीरों का कॉलेज। यहां अद्भुत और गर्व का अप्रतिम अनुभूति होती है। यह अनुभूति व गर्व है मातृभूमि के लिए सर्वोच्‍च बलिदान का। हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ के सेक्‍टर 10 के डीएवी कॉलेज की। इस कॉलेज ने देश को चिरकाल तक मस्‍तक ऊंचा रखने वाले सपूत दिए। यहां से निकले परमवीर चक्र विजेता विक्रम वत्रा, महावीर चक्र विजेता मेजर संदीप सागर, सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू और वीर चक्र विजेता कैप्टन विजंयत थापर जैसे 10 विद्यार्थी बलिदान हो गए।

विक्रम बत्रा, मेजर संदीप सागर, सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू व कैप्टन विजंयत थापर जैसे वीर इसी कॉलेज से

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तीनों सेनाओं में यहां से निकले करीब 100 से अधिक विद्यार्थी देश की सेवा में जुटे हैं। इस साल गणतंत्र दिवस पर भी कॉलेज के पूर्व स्टूडेंट शहीद स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ विशिष्ठ को वायुसेना मेडल से सम्मानित किया गया। सैन्‍य सेवा के माध्‍यम से देश की सेवा करने का जज्‍बा यहां अब परंपरा में शामिल हो गया है। यहां पढ़ रहे विद्यार्थियों के हीरो ये रणबांकुरे हैं और वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने को तत्‍पर व संकल्‍पबद्ध नजर आते हैं।

देश का इकलौता कॉलेज जिसके परिसर में है वार मेमोरियल

कॉलेज के प्रिसिंपल पवन शर्मा ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने इन वीरों के सम्मान में अपने एडमिन ब्लॉक का नाम शौर्य भवन रखा है। इसी शौर्य भवन में एक म्यूजियम है जहां वीर सैनिकों की फोटो को सजाया गया है। इसके अलावा कॉलेज परिसर में ही वार मेमोरियल बनाया गया है।

परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र जैसे गैलेंटरी अवार्ड से हैं सुशोभित

उन्‍होंने बताया कि वार मेमोरियल में ‘शेरशाह’ विक्रम बत्रा, मेजर संदीप सागर, राजीव संधू और मेजर विजंयत थापर के स्मृति चिन्ह लगाए हैं। इन शहीदों के प्रति स्टूडेंट्स और कॉलेज स्टॉफ की इतनी आस्था है कि वे जब भी इसके सामने से गुजरते हैं तो इनके सम्मान में सिर झुकाकर आगे बढ़ते हैं।

डीएवी कॉलेज से इसलिए निकलते हैं सैन्य अधिकारी

डीएवी कॉलेज के फिजिकल एजुकेशन के प्रोफेसर रविंद्र चौधरी बताते हैं कि कॉलेज से इसलिए बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी निकलते हैं, क्‍यों‍कि कॉलेज का इतिहास वार हीरो से भरा पड़ा है। कॉलेज में उन्हें इस तरह का माहौल मिलता है कि वे सेना में शामिल होकर देशसेवा के लिए प्ररित होते हैं। ‘वार हीरो’ यहां के विद्यार्थियों के लिए प्ररेणास्त्रोत बनते हैं। इसके अलावा कॉलेज में एनसीसी का आर्मी विंग, एयरफोर्स विंग और नेवल विंग है। सैंकड़ों की संख्या में छात्र अपने सेशन की शुरुआत में ही एनसीसी से जुड़ जाते हैं और तीन साल बाद एनसीसी का सी सर्टिफिकेट लेकर कॉलेज से बाहर जाते हैं।

 

इकलौता कॉलेज जिसके 13 स्टूडेंट्स हुए शहीद

उन्‍होंने बताया कि एनसीसी का सी सर्टिफिकेट पाने वाले वलंटियर्स की वेपन ट्रेनिंग, मैप रिडिंग ट्रेनिंग और फिटनेस ट्रेनिंग लगभग सैन्य अधिकारियों की तरह हो चुकी होती है। ऐसे में छात्र सीधे सेना में बतौर सैन्य अधिकारी चले जाते हैं। इसके अलावा कॉलेज में खेल और पढ़ाई का भी बेहतर माहौल है। कुछ खिलाड़ी अपनी खेल क्षमता की बदौलत सेना ज्वाइन कर लेते हैं। हमारी यही कोशिश रहती है कि हम अपने इस शानदार इतिहास को संजोएं और आगे बढ़ाएं।

कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के विक्रम बत्रा की प्रारंभिक शिक्षा पालमपुर में हुई। इसके बाद वह चंडीगढ़ के सेक्‍टर 10 के डीएवी कॉलेज आ गए। साल 1996 में उन्होंने सेना ज्वाइन की। 1 जून 1999 को उनकी टुकड़ी को कारगिल में भेजा गया। बाद में मोर्चों पर फतह के बाद विक्रम को कैप्टन बना दिया गया।

उन्होंने अपनी जीत पर लिखा था ‘यह दिल मांगे मोर।’ यह कारगिल युद्ध में वीरता का जैसे मंत्र बन गया था। उनकी बहादुरी को देखते हुए कर्नल वाईके जोशी ने विक्रम को शेरशाह का नाम दिया था। वह 7 जुलाई 1999 को बलिदान हो गए। उनको मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्‍मानित किया गया। कॉलेज में आज भी उनकी यादें कैद हैं और पुराने शिक्षक उनको याद कर भावुक हो जाते हैं।

ऑपरेशन विजय में अदम्य साहस के लिए मेजर संदीप सागर को महावीर चक्र

डीएवी कॉलेज के पूर्व स्टूडेंट मेजर संदीप सागर को महावीर चक्र मिला। कारगिल युद्ध के दौरान ही 25 जून 1999 को दुश्मन की बिछाई बारूदी सुरंग फटने से मेजर संदीप सागर वीरगति को प्राप्त हो गए।

मरणोपंरात महावीर चक्र पाने सबसे युवा सैनिक हैं राजीव संधू

डीएवी कॉलेज के पूर्व स्टूडेंट सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू श्रीलंका में आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए 19 जुलाई 1988 को शहीद हो गए थे। श्रीलंका में आतंकवाद को खत्म करने के लिए गई इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के ऑपरेशन विराट में हिस्सा लेने के राजीव संधू सात असम यूनिट के साथ इस मिशन में गए थे। उन्होंने 21 साल की उम्र में शहादत पाकर वीरता की नई मिसाल दी, उन्हें इस अदम्य साहस और शौर्य के लिए मरणोपंरात महावीर चक्र मिला। वह सबसे छोटी उम्र में महावीर चक्र पाने वाले सैन्य अधिकारी हैं।

वीर चक्र विजेता मेजर विजंयत थापर

डीएवी कॉलेज के पूर्व स्टूडेंट कैप्टन विजंयत थापर ने 22 साल की उम्र में शहादत पाई। उन्होंने राजपूताना राइफल्स में कमिशन लिया। जून 1999 में कैप्टन विजयंत ने तोलोनिंग (कारगिल) पर विजय हासिल की और भारत का तिरंगा लहराया। पाकिस्तानी फौज ने पिंपल्स और नॉल हिल्स पर कब्जा कर लिया था, इन्हें खदेड़ने की जिम्मेदारी विजंयत को मिली। चांदनी रात में पूरी तरह से दुश्मन की फायरिंग रेंज में होने के बावजूद विजयंत आगे बढ़े और जीतकर ही माने, लेकिन वह इस दौरान शहीद हो गए।

शहादत पाने वाले डीएवी के शूरवीर

1.विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र।

2.मेजर संदीप सागर,महावीर चक्र।

3.सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू,महावीर चक्र।

4.कैप्टन विजंयत थापर, वीरचक्र।

5.स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ विशिष्ठ, वायुसेना मेडल।

6.लेफ्टिनेंट अनिल यादव।

7.मेजर नवनीत वत्स, सेना मेडल।

8. कैप्टन रोहित कौशल, सेना मेडल।

9. कैप्टन अतुल शर्मा।

10. बिग्रेडियर बलविन्द्र सिंह शेरगिल।

11.कैप्टन रिपुदमन सिंह।

12.मेजर मलविंदर सिंह।

13.फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरसिमरत सिंह ढींढसा।

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